पैग़ाम है माँ का ये बेटे के नाम
तेरा काम है देना अमन का पैग़ाम
तेरा काम है देना अमन का पैग़ाम
क्या माँ ने झूठ बोला था सोचा बहुत सुबह शाम
फिर सवाल किया मैंने लेकर प्रभु का नाम
निहारा उसने ऐसे मुझको जैसे मैं घनश्याम
फिर यूँ बोली मुझसे बेटा मत दे इल्ज़ाम
जो कहा उसे तू इक वसीयत समझ मेरी
जिसे पूरा करना ही अब है तेरा काम
हंस यहां अपशकुन करे जंगल जले तमाम
हर पेड़ पे लिखना अल्लाह तू पात पात पे राम
अपने रूप सा सुंदर तू बनाना दुनिया सारी
हर जन को पहुंचाकर 'अमन का पैग़ाम'
(मशहूर शायर जनाब अमीर नहटौरी के कलाम से मुतास्सिर होकर)
आग नफ़रत की दिलों से तुम बुझा दो लोगो
प्यार के फूल गुलशन में फिर खिला दो लोगो
हमने वेद ओ क़ुरआन से यही सीखा है
दर्स वहदत का दुनिया को पढ़ा दो लोगो
एक थे एक हैं और एक रहेंगे हम सदा
यह अमल करके दुश्मन को दिखा दो लोगो
विनती हरेक से यही करता है अनवर
धर्म के लिए मत की हर दिवार गिरा दो लोगो
(मशहूर शायर जनाब अमीर नह्टोरी के कलाम से मुतास्सिर होकर)
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वहदत-एकत्व
आग नफ़रत की दिलों से तुम बुझा दो लोगो
प्यार के फूल गुलशन में फिर खिला दो लोगो
हमने वेद ओ क़ुरआन से यही सीखा है
दर्स वहदत का दुनिया को पढ़ा दो लोगो
एक थे एक हैं और एक रहेंगे हम सदा
यह अमल करके दुश्मन को दिखा दो लोगो
विनती हरेक से यही करता है अनवर
धर्म के लिए मत की हर दिवार गिरा दो लोगो
(मशहूर शायर जनाब अमीर नह्टोरी के कलाम से मुतास्सिर होकर)
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वहदत-एकत्व