Friday, September 14, 2012

यह व्यंग्य नहीं है, कार्टून तो नहीं ही है -राजेन्द्र धोड़पकर

जब 25 साल पहले कार्टून बनाना शुरू किया था, तब नहीं सोचा था कि यह इतना संगीन मामला है। ममता बनर्जी ने एक कार्टून को सिर्फ ई-मेल पर फॉरवर्ड करने वाले को किसी महिला की इज्जत पर हमला करने के आरोप में जेल भेज दिया। एक कार्टूनिस्ट नरेंद्र मोदी का कार्टून बनाने के लिए जेल भेज दिया गया। एक कार्टूनिस्ट पर देशद्रोह का इल्जाम लगाकर जेल में डाल दिया गया। अब भी भारतीय दंड संहिता में ढेर सारी धाराएं बची हुई हैं और कार्टूनिस्टों की तादाद उतनी नहीं है। हो सकता है कि एक-एक कार्टूनिस्ट पर 20-20 धाराएं लगा दी जाएं या व्यंग्य के दूसरे क्षेत्रों के लोगों का नंबर लग जाए। अचरज नहीं कि किसी व्यंग्यकार पर 302 यानी हत्या का मामला दर्ज हो जाए। किसी पर डकैती का केस हो जाए। सोच रहा हूं कि अखबार में बाकायदा विज्ञापन छपवा दूं कि मैं हास्य-व्यंग्य से कोई ताल्लुक आइंदा नहीं रख रहा हूं और अपने पिछले तमाम व्यंग्य लेखों या कार्टूनों को भी अमान्य करता हूं। जिन्हें भी भारतीय दंड संहिता का रचनात्मक उपयोग करना है, वे अन्य कार्टूनिस्टों और व्यंग्यकारों पर विभिन्न धाराओं का इस्तेमाल करें।
कई लोग हैं, जिनकी महत्वाकांक्षा व्यंग्यकार कहलाने की है। उनकी जबर्दस्त लगन के बावजूद इस मिशन में वे जरा-सा चूक जाते हैं, उनकी कृतियां हास्यास्पद हो जाती हैं, हास्यजनक नहीं हो पातीं। मैं जेल भिजवाने के इच्छुक लोगों से आग्रह करता हूं कि इन्हें सहर्ष पकड़कर ले जाएं। इससे दो फायदे होंगे, जेल जाने से वे प्रमाणित व्यंग्यकार हो जाएंगे और लोग उनके हास्यास्पद व्यंग्य पढ़ने के कष्ट से वंचित हो जाएंगे। यही बात कुछ कार्टूनिस्टों के बारे में भी सही है। और एक तीसरा फायदा यह होगा कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर इन्हें छुड़वाने के लिए मुहिम चलाने की जिम्मेदारी लेखकों, कलाकारों, नेताओं आदि के जिम्मे आ जाएगी, जिसमें कोई यह कह भी नहीं सकेगा कि ये बेहूदा व्यंग्य लिखते हैं या कार्टून बनाते हैं। मैंने अपनी ओर से भरसक कोशिश की है कि यह गंभीर लेख बने, इसलिए इसके व्यंग्य हो जाने का खतरा है। लेकिन मैं फिर यह कहना चाहता हूं कि यह व्यंग्य नहीं है।

Source : http://www.livehindustan.com/news/editorial/guestcolumn/article1-story-57-62-261689.html

1 comment:

Kumar Radharaman said...

व्यंग्य के स्तर पर जब कोई कार्टूनिस्ट बात करता है,तो बात गंभीर होती ही है।